श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.40.11 
रथमारोह भद्रं ते राजपुत्र महायश:।
क्षिप्रं त्वां प्रापयिष्यामि यत्र मां राम वक्ष्यसे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे यशस्वी राजकुमार श्री राम! आपका कल्याण हो। आप इस रथ पर विराजमान हो जाइए। आप मुझे जहाँ भी ले चलेंगे, मैं आपको शीघ्र ही वहाँ ले चलूँगा॥ 11॥
 
'O glorious prince Shri Ram! May you be blessed. Please sit on this chariot. Wherever you tell me to, I will take you there quickly.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)