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ramayan 2.4.44: 'सुमित्रानन्दन! आप राज्य के इच्छित सुखों और उत्तम फलों का उपभोग करें। आपके लिए ही मैं इस जीवन और राज्य की कामना करता हूँ। 44॥   |   ramayan सर्ग 2.4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.4.44 
सौमित्रे भुङ्क्ष्व भोगांस्त्वमिष्टान् राज्यफलानिच।
जीवितं चापि राज्यं च त्वदर्थमभिकामये॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
'सुमित्रानन्दन! आप राज्य के इच्छित सुखों और उत्तम फलों का उपभोग करें। आपके लिए ही मैं इस जीवन और राज्य की कामना करता हूँ। 44॥
 
'Sumitranandan! May you enjoy the desired pleasures and the best fruits of the kingdom. It is for you only that I desire this life and kingdom. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)