श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.4.42 
इत्येवमुक्तो मात्रा तु रामो भ्रातरमब्रवीत्।
प्राञ्जलिं प्रह्वमासीनमभिवीक्ष्य स्मयन्निव॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
माता के ऐसा कहने पर श्री रामजी हाथ जोड़कर विनीत भाव से खड़े हो गए और अपने भाई लक्ष्मण की ओर देखकर मुस्कुराकर बोले -॥42॥
 
When his mother said this, Sri Rama stood with folded hands in a humble manner and looking at his brother Lakshmana smilingly said -॥ 42॥
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