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श्लोक  2.4.39 
वत्स राम चिरं जीव हतास्ते परिपन्थिन:।
ज्ञातीन् मे त्वं श्रिया युक्त: सुमित्रायाश्च नन्दय॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'पुत्र श्री राम! आप चिरंजीवी हों। आपके मार्ग में बाधा डालने वाले शत्रुओं का नाश हो। आप राजलक्ष्मी के साथ मिलकर मेरे और सुमित्रा के परिजनों को सुखी बनाएँ।'
 
'Son Shri Ram! May you live forever. May the enemies creating obstacles in your path be destroyed. You, united with Raja Lakshmi, make my and Sumitra's relatives happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)