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ramayan 2.4.33: पुष्यनक्षत्र के संयोग से अपने पुत्र के युवराज पद पर अभिषिक्त होने का समाचार सुनकर वह प्राणायाम द्वारा भगवान नारायण का ध्यान करती हुई उसकी मंगलकामना कर रही थी ॥33॥   |   ramayan सर्ग 2.4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.4.33 
श्रुत्वा पुष्ये च पुत्रस्य यौवराज्येऽभिषेचनम्।
प्राणायामेन पुरुषं ध्यायमाना जनार्दनम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पुष्यनक्षत्र के संयोग से अपने पुत्र के युवराज पद पर अभिषिक्त होने का समाचार सुनकर वह प्राणायाम द्वारा भगवान नारायण का ध्यान करती हुई उसकी मंगलकामना कर रही थी ॥33॥
 
Hearing the news of her son being anointed as the crown prince in the conjunction of Pushyanakshatra, she was meditating on the Supreme Lord Narayana through Pranayama, wishing him well. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)