Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.4.26-27: ‘इसमें कोई संदेह नहीं कि आपके भाई भरत उत्तम पुरुषों के आचार में स्थित हैं, अपने बड़े भाई का अनुसरण करते हैं, सदाचारी हैं, दयालु हैं और अपनी इन्द्रियों को वश में किए हुए हैं; तथापि मनुष्यों का मन प्रायः स्थिर नहीं होता – ऐसा मेरा मत है। रघुनन्दन! पुण्यात्मा और गुणवान पुरुषों का मन भी अनेक कारणों से राग, द्वेष आदि से प्रभावित हो जाता है।’॥26-27॥ | ramayan सर्ग 2.4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कामं खलु सतां वृत्ते भ्राता ते भरत: स्थित:।
ज्येष्ठानुवर्ती धर्मात्मा सानुक्रोशो जितेन्द्रिय:॥ २६॥
किं नु चित्तं मनुष्याणामनित्यमिति मे मतम्।
सतां च धर्मनित्यानां कृतशोभि च राघव॥ २७॥
अनुवाद
‘इसमें कोई संदेह नहीं कि आपके भाई भरत उत्तम पुरुषों के आचार में स्थित हैं, अपने बड़े भाई का अनुसरण करते हैं, सदाचारी हैं, दयालु हैं और अपनी इन्द्रियों को वश में किए हुए हैं; तथापि मनुष्यों का मन प्रायः स्थिर नहीं होता – ऐसा मेरा मत है। रघुनन्दन! पुण्यात्मा और गुणवान पुरुषों का मन भी अनेक कारणों से राग, द्वेष आदि से प्रभावित हो जाता है।’॥26-27॥
‘There is no doubt that your brother Bharat is established in the conduct of good men, he follows his elder brother, he is virtuous, kind and has controlled his senses, however, the mind of men is usually not stable – this is my opinion. Raghunandan! The mind of even the virtuous and virtuous men gets affected by passion, hatred etc. due to various reasons.’॥ 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥