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ramayan 2.4.25: 'जब तक भरत अपने मामा के साथ इस नगरी के बाहर रहेंगे, तब तक मुझे उचित प्रतीत होता है कि आप ही राजा के पद पर अभिषिक्त हों।॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 2.4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.4.25 
विप्रोषितश्च भरतो यावदेव पुरादित:।
तावदेवाभिषेकस्ते प्राप्तकालो मतो मम॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'जब तक भरत अपने मामा के साथ इस नगरी के बाहर रहेंगे, तब तक मुझे उचित प्रतीत होता है कि आप ही राजा के पद पर अभिषिक्त हों।॥ 25॥
 
'As long as Bharata stays outside this city with his maternal uncle, it seems appropriate to me that you should be anointed as the king.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)