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ramayan 2.4.22: 'अतः तुम्हें उस पुष्यनाशत्र में अपना अभिषेक करवाना चाहिए। हे शत्रुओं को संताप देने वाले वीर! मेरा हृदय मुझे यह कार्य शीघ्र करने को कह रहा है। इसलिए मैं कल अवश्य ही तुम्हारा युवराज पद पर अभिषेक करूँगा।'   |   ramayan सर्ग 2.4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.4.22 
तत्र पुष्येऽभिषिञ्चस्व मनस्त्वरयतीव माम्।
श्वस्त्वाहमभिषेक्ष्यामि यौवराज्ये परंतप॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'अतः तुम्हें उस पुष्यनाशत्र में अपना अभिषेक करवाना चाहिए। हे शत्रुओं को संताप देने वाले वीर! मेरा हृदय मुझे यह कार्य शीघ्र करने को कह रहा है। इसलिए मैं कल अवश्य ही तुम्हारा युवराज पद पर अभिषेक करूँगा।'
 
‘Therefore, you should get yourself anointed in that Pushyanashatra. O brave one who torments the enemies! My heart tells me to do this work very quickly. That is why I will definitely anoint you as the crown prince tomorrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)