श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.4.21 
अद्य चन्द्रोऽभ्युपगमत् पुष्यात् पूर्वं पुनर्वसुम्।
श्व: पुष्ययोगं नियतं वक्ष्यन्ते दैवचिन्तका:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'आज चन्द्रमा पुष्य से एक नक्षत्र पहले पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित है, अतः कल वह निश्चित रूप से पुष्य नक्षत्र में होगा - ऐसा ज्योतिषियों का कहना है।
 
'Today the Moon is situated in Punarvasupara, one nakshatra before Pushya, so tomorrow it will certainly be in Pushya nakshatra - so say the astrologers.
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