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तद् यावदेव मे चेतो न विमुह्यति राघव।
तावदेवाभिषिञ्चस्व चला हि प्राणिनां मति:॥ २०॥
अनुवाद
'अतः रघुनन्दन! जब तक मेरा मन आसक्ति से परिपूर्ण न हो, तब तक आप युवराज पद पर अभिषिक्त हो जाइये; क्योंकि जीवों की बुद्धि चंचल होती है।
'So Raghunandan! As long as my mind is not filled with attachment, you should get yourself anointed as the crown prince; Because the intelligence of living beings is fickle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥