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ramayan 2.4.17: ‘रघुकुलनन्दन श्री राम! इन दिनों मुझे बड़े बुरे स्वप्न आ रहे हैं। दिन में वज्र के साथ-साथ अत्यन्त भयानक शब्द करने वाली उल्काएँ भी गिर रही हैं।॥17॥   |   ramayan सर्ग 2.4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.4.17 
अपि चाद्याशुभान् राम स्वप्नान् पश्यामि राघव।
सनिर्घाता दिवोल्काश्च पतन्ति हि महास्वना:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘रघुकुलनन्दन श्री राम! इन दिनों मुझे बड़े बुरे स्वप्न आ रहे हैं। दिन में वज्र के साथ-साथ अत्यन्त भयानक शब्द करने वाली उल्काएँ भी गिर रही हैं।॥17॥
 
‘Raghukulanandan Shri Ram! These days I am having very bad dreams. During the day, along with thunderbolts, meteors making a very terrifying sound are also falling.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)