श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.4.15 
न किंचिन्मम कर्तव्यं तवान्यत्राभिषेचनात्।
अतो यत्त्वामहं ब्रूयां तन्मे त्वं कर्तुमर्हसि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अब तुम्हें युवराज पद पर अभिषिक्त करने के अतिरिक्त मेरे लिए और कोई कर्तव्य नहीं रह गया है, इसलिए जो कुछ मैं तुमसे कहूँ, उसे तुम्हें मानना ​​होगा॥15॥
 
'Now there is no other duty left for me except to anoint you as the crown prince, therefore you must obey whatever I tell you.॥ 15॥
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