श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम का माता को समाचार बताना और माता से आशीर्वाद पाकर लक्ष्मण से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.4.13 
जातमिष्टमपत्यं मे त्वमद्यानुपमं भुवि।
दत्तमिष्टमधीतं च मया पुरुषसत्तम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषोत्तम! आप मेरे परम प्रिय एवं अभीष्ट पुत्र के रूप में मेरे यहाँ उत्पन्न हुए, जिनकी उपमा इस संसार में अद्वितीय है। मैंने भी दान, यज्ञ और स्वाध्याय किया था।॥13॥
 
'Purushottam! You were born to me as my most beloved and desired child, whose parallel is unmatched in this world. I also performed charity, sacrifices and self-study.॥ 13॥
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