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ramayan 2.39.7: ये सब लोग उस कैकेयी के कारण ही महान संकट में पड़े हैं, जो वरदान रूपी छल का आश्रय लेकर अपने स्वार्थ की पूर्ति में लगी हुई थी। ॥7॥   |   ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.39.7 
एकस्या: खलु कैकेय्या: कृतेऽयं खिद्यते जन:।
स्वार्थे प्रयतमानाया: संश्रित्य निकृतिं त्विमाम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ये सब लोग उस कैकेयी के कारण ही महान संकट में पड़े हैं, जो वरदान रूपी छल का आश्रय लेकर अपने स्वार्थ की पूर्ति में लगी हुई थी। ॥7॥
 
"All these people have fallen into great trouble because of Kaikeyi alone who, by taking recourse to this deceit in the form of a boon, was engaged in the fulfillment of her own selfish interests." ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)