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ramayan 2.39.33: तब परम मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामजी ने माता कौशल्या की ओर, जो माताओं के बीच बड़े आदर से खड़ी थीं, देखकर हाथ जोड़कर कहा-॥33॥   |   ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.39.33 
तां प्राञ्जलिरभिप्रेक्ष्य मातृमध्येऽतिसत्कृताम्।
राम: परमधर्मात्मा मातरं वाक्यमब्रवीत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब परम मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामजी ने माता कौशल्या की ओर, जो माताओं के बीच बड़े आदर से खड़ी थीं, देखकर हाथ जोड़कर कहा-॥33॥
 
Then the most virtuous Sri Rama, looking at mother Kausalya, who was standing with great respect among the mothers, said with folded hands -॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)