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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.39.27 
करिष्ये सर्वमेवाहमार्या यदनुशास्ति माम्।
अभिज्ञास्मि यथा भर्तुर्वर्तितव्यं श्रुतं च मे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'आर्य! आप मुझे जो भी सलाह दे रहे हैं, मैं उसका पूरी तरह पालन करूँगा। मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि अपने स्वामी के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए; क्योंकि मैंने इस विषय में पहले ही सुन लिया है।
 
'Arya! Whatever advice you are giving me, I will follow it completely. I know very well how one should behave with one's master; because I have already heard about this topic.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)