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ramayan 2.39.24: इसके विपरीत जो पतिव्रता स्त्रियाँ सत्य, सदाचार, शास्त्र और कुल मर्यादा का पालन करती हैं, उनके लिए उनका पति ही सबसे पवित्र और श्रेष्ठ देवता है ॥24॥   |   ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.39.24 
साध्वीनां तु स्थितानां तु शीले सत्ये श्रुते स्थिते।
स्त्रीणां पवित्रं परमं पतिरेको विशिष्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इसके विपरीत जो पतिव्रता स्त्रियाँ सत्य, सदाचार, शास्त्र और कुल मर्यादा का पालन करती हैं, उनके लिए उनका पति ही सबसे पवित्र और श्रेष्ठ देवता है ॥24॥
 
On the contrary, for those virtuous women who follow truth, good conduct, the scriptures and the family decorum, their husband alone is the most pure and best god. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)