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ramayan 2.39.21: 'दुष्ट स्त्रियों का स्वभाव है कि पहले तो वे अपने पति के द्वारा बहुत सुख भोगती हैं, परन्तु जब पति को जरा भी कष्ट होता है, तब वे उसे दोष देकर त्याग देती हैं।॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.39.21 
एष स्वभावो नारीणामनुभूय पुरा सुखम्।
अल्पामप्यापदं प्राप्य दुष्यन्ति प्रजहत्यपि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'दुष्ट स्त्रियों का स्वभाव है कि पहले तो वे अपने पति के द्वारा बहुत सुख भोगती हैं, परन्तु जब पति को जरा भी कष्ट होता है, तब वे उसे दोष देकर त्याग देती हैं।॥ 21॥
 
'It is the nature of wicked women that at first they enjoy ample happiness through their husbands, but when he faces even the slightest difficulty, they blame him and abandon him.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)