Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.39.11: ‘जब माता-पिता ही अपने श्रेष्ठ और वीर पुत्र को घर से निकालकर वन में भेज रहे हैं, तब ऐसा प्रतीत होता है कि यह शास्त्रों में वर्णित सत्पुरुषों के गुणों का ही फल है।’ 11॥ | ramayan सर्ग 2.39: राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं मन्ये गुणवतां गुणानां फलमुच्यते।
पित्रा मात्रा च यत्साधुर्वीरो निर्वास्यते वनम्॥ ११॥
अनुवाद
‘जब माता-पिता ही अपने श्रेष्ठ और वीर पुत्र को घर से निकालकर वन में भेज रहे हैं, तब ऐसा प्रतीत होता है कि यह शास्त्रों में वर्णित सत्पुरुषों के गुणों का ही फल है।’ 11॥
‘When the parents themselves are throwing their best and brave son out of the house and sending him to the forest, then it seems that this is the result of the qualities of virtuous men as described in the scriptures.’ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥