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ramayan 2.38.16: 'आप परम पूज्य पति के रूप में इस प्रकार प्रतिष्ठित हों कि मेरी तपस्विनी माता पुत्र-वियोग का शोक न अनुभव करें और मेरा स्मरण करते हुए आपकी शरण में रहकर जीवन व्यतीत करें।' ॥16॥   |   ramayan सर्ग 2.38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.38.16 
पुत्रशोकं यथा नर्च्छेत् त्वया पूज्येन पूजिता।
मां हि संचिन्तयन्ती सा त्वयि जीवेत् तपस्विनी॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'आप परम पूज्य पति के रूप में इस प्रकार प्रतिष्ठित हों कि मेरी तपस्विनी माता पुत्र-वियोग का शोक न अनुभव करें और मेरा स्मरण करते हुए आपकी शरण में रहकर जीवन व्यतीत करें।' ॥16॥
 
'You are honoured with the most revered husband in such a way that my ascetic mother may not experience the grief of losing a son and may lead her life under your protection even while thinking of me.' ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)