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ramayan 2.38.13: जब राजा दशरथ सिर झुकाकर बैठे हुए ये बातें कह रहे थे, उस समय भगवान राम वन की ओर जाते हुए अपने पिता से बोले-॥13॥   |   ramayan सर्ग 2.38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.38.13 
एवं ब्रुवन्तं पितरं राम: सम्प्रस्थितो वनम्।
अवाक्शिरसमासीनमिदं वचनमब्रवीत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब राजा दशरथ सिर झुकाकर बैठे हुए ये बातें कह रहे थे, उस समय भगवान राम वन की ओर जाते हुए अपने पिता से बोले-॥13॥
 
When King Dasharatha was sitting with his head bent and saying these things, at that time Lord Rama, while going towards the forest, said to his father -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)