श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.38.11 
प्रतिज्ञातं मया तावत् त्वयोक्तं देवि शृण्वता।
रामं यदभिषेकाय त्वमिहागतमब्रवी:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'देवी! जब श्री राम अभिषेक के लिए यहाँ आये थे, तब आपकी कही हुई बातें सुनकर मैंने उन्हें इतना ही देने का प्रण किया था।
 
'Devi! When Shri Ram came here for the Abhishekam, after listening to what you had said to him, I had vowed to give him only that much.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)