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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 38: राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना
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श्लोक 1
श्लोक
2.38.1
तस्यां चीरं वसानायां नाथवत्यामनाथवत्।
प्रचुक्रोश जन: सर्वो धिक् त्वां दशरथं त्विति॥ १॥
अनुवाद
जब सीता अच्छी तरह से पालित होने पर भी अनाथों की भाँति चिथड़े पहनने लगीं, तब सब लोग चिल्लाने लगे - "राजा दशरथ! तुम्हें लज्जा आनी चाहिए!"॥1॥
When Sita, despite being well-cared for, started wearing rags like an orphan, everyone started shouting - "King Dasharatha! Shame on you!"॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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