Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.37.9-12: तदनन्तर, जनकपुत्री सीता, जो रेशमी वस्त्र धारण करती थीं, धर्म में पारंगत तथा धर्म में तत्पर थीं, जब उन्होंने अपने लिए रखे हुए वस्त्र को देखा, तो वे उसी प्रकार भयभीत हो गईं, जैसे जाल बिछा हुआ देखकर हिरणी डर जाती है। कैकेयी के हाथों से छाल के दो वस्त्र लेते समय वे लज्जित हुईं। उन्हें बड़ा दुःख हुआ और उनकी आँखें आँसुओं से भर आईं। उस समय उन्होंने गंधर्वराज के समान तेजस्वी अपने पति से पूछा, "प्रभु, वन में रहने वाले ऋषिगण यह वस्त्र किस प्रकार बाँधते हैं?" ऐसा कहकर सीता बार-बार उसे पहनने के लिए ललचातीं और भूल से बैठ जातीं। | ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथात्मपरिधानार्थं सीता कौशेयवासिनी।
सम्प्रेक्ष्य चीरं संत्रस्ता पृषती वागुरामिव॥ ९॥
सा व्यपत्रपमाणेव प्रगृह्य च सुदुर्मना:।
कैकेय्या: कुशचीरे ते जानकी शुभलक्षणा॥ १०॥
अश्रुसम्पूर्णनेत्रा च धर्मज्ञा धर्मदर्शिनी।
गन्धर्वराजप्रतिमं भर्तारमिदमब्रवीत्॥ ११॥
कथं नु चीरं बघ्नन्ति मुनयो वनवासिन:।
इति ह्यकुशला सीता सा मुमोह मुहुर्मुहु:॥ १२॥
अनुवाद
तदनन्तर, जनकपुत्री सीता, जो रेशमी वस्त्र धारण करती थीं, धर्म में पारंगत तथा धर्म में तत्पर थीं, जब उन्होंने अपने लिए रखे हुए वस्त्र को देखा, तो वे उसी प्रकार भयभीत हो गईं, जैसे जाल बिछा हुआ देखकर हिरणी डर जाती है। कैकेयी के हाथों से छाल के दो वस्त्र लेते समय वे लज्जित हुईं। उन्हें बड़ा दुःख हुआ और उनकी आँखें आँसुओं से भर आईं। उस समय उन्होंने गंधर्वराज के समान तेजस्वी अपने पति से पूछा, "प्रभु, वन में रहने वाले ऋषिगण यह वस्त्र किस प्रकार बाँधते हैं?" ऐसा कहकर सीता बार-बार उसे पहनने के लिए ललचातीं और भूल से बैठ जातीं।
Thereafter, Sita, the daughter of Janaka, who wore silk clothes and was well versed with Dharma and focused on Dharma, was frightened when she saw the cloth offered for her to wear, just like a deer is frightened when she sees a net laid out. She was ashamed after taking the two bark cloths from Kaikeyi's hands. She felt very sad and her eyes filled with tears. At that time, she asked her husband, who was as brilliant as the king of Gandharvas, "Lord, how do the sages living in the forest tie the cloth?" Saying this, Sita was repeatedly tempted to wear it and would sit down by mistake.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥