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ramayan 2.37.8: इसी प्रकार लक्ष्मण ने भी अपने पिता के सामने अपने दोनों सुन्दर वस्त्र उतार दिये और तपस्वियों के समान छाल के वस्त्र पहन लिये।   |   ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.37.8 
लक्ष्मणश्चापि तत्रैव विहाय वसने शुभे।
तापसाच्छादने चैव जग्राह पितुरग्रत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार लक्ष्मण ने भी अपने पिता के सामने अपने दोनों सुन्दर वस्त्र उतार दिये और तपस्वियों के समान छाल के वस्त्र पहन लिये।
 
Similarly, Lakshmana also took off both his beautiful garments in front of his father and wore bark clothes like those of ascetics.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)