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ramayan 2.37.7: नरसिंह श्री राम ने कैकेयी के हाथ से दो वस्त्र ले लिए, अपने उत्तम वस्त्र उतार दिए और मुनियों के वस्त्र पहन लिए।   |   ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.37.7 
स चीरे पुरुषव्याघ्र: कैकेय्या: प्रतिगृह्य ते।
सूक्ष्मवस्त्रमवक्षिप्य मुनिवस्त्राण्यवस्त ह॥ ७॥
 
 
अनुवाद
नरसिंह श्री राम ने कैकेयी के हाथ से दो वस्त्र ले लिए, अपने उत्तम वस्त्र उतार दिए और मुनियों के वस्त्र पहन लिए।
 
The lion of men, Shri Ram, took two pieces of cloth from Kaikeyi's hand, removed his fine clothes and wore the clothes of sages. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)