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ramayan 2.37.4: 'हे राजन! श्रेष्ठ पुरुषों में श्रेष्ठ! मुझे सेना से इस प्रकार क्या लेना-देना? मैं भरत को ये सब वस्तुएँ अर्पित करने की अनुमति देती हूँ। (माता कैकेयी की दासियाँ) मेरे लिए एक चीर (कपड़े का टुकड़ा या छाल का कपड़ा) लाएँ।'   |   ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.37.4 
तथा मम सतां श्रेष्ठ किं ध्वजिन्या जगत्पते।
सर्वाण्येवानुजानामि चीराण्येवानयन्तु मे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'हे राजन! श्रेष्ठ पुरुषों में श्रेष्ठ! मुझे सेना से इस प्रकार क्या लेना-देना? मैं भरत को ये सब वस्तुएँ अर्पित करने की अनुमति देती हूँ। (माता कैकेयी की दासियाँ) मेरे लिए एक चीर (कपड़े का टुकड़ा या छाल का कपड़ा) लाएँ।'
 
'O King, the best among the noble souls! What do I have to do with the army in this way? I give permission to offer all these things to Bharat. (Mother Kaikeyi's maids) should bring me a rag (a piece of cloth or bark cloth).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)