श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.37.36 
यानैश्च मुख्यै: परिचारकैश्च
सुसंवृता गच्छतु राजपुत्री।
वस्त्रैश्च सर्वै: सहितैर्विधानै-
र्नेयं वृता ते वरसम्प्रदाने॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'राजकुमारी सीता अपने मुख्य सेवकों और सवारियों के साथ, सभी प्रकार के वस्त्रों और आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित होकर वन में जाएँ। वर माँगते समय आपने सीता के वनवास के विषय में कुछ नहीं कहा था (अतः उन्हें छाल के वस्त्र नहीं पहनाए जा सकते)।'
 
‘Princess Sita should travel to the forest with her chief servants and rides, equipped with all kinds of clothes and necessary equipment. While asking for the boon, you had not mentioned anything about Sita's exile (so she cannot be dressed in bark clothes)'.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas