Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.37.34: ‘देवि! सीता आपकी पुत्रवधू हैं। इनके शरीर से पुराने वस्त्र उतारकर इन्हें उत्तम वस्त्र और आभूषण पहनाइए। इन्हें वल्कल वस्त्र देना कदापि उचित नहीं है।’ ऐसा कहकर वशिष्ठजी ने जानकी को वल्कल वस्त्र पहनाने से मना किया। | ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘देवि! सीता आपकी पुत्रवधू हैं। इनके शरीर से पुराने वस्त्र उतारकर इन्हें उत्तम वस्त्र और आभूषण पहनाइए। इन्हें वल्कल वस्त्र देना कदापि उचित नहीं है।’ ऐसा कहकर वशिष्ठजी ने जानकी को वल्कल वस्त्र पहनाने से मना किया।
'Goddess! Sita is your daughter-in-law. Remove the old clothes from their bodies and give them the best clothes and jewelery to wear. It is never appropriate to give them Valkal-clothes.' Saying this, Vashishtha forbade him from wearing Valkal-clothes to Janaki. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥