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ramayan 2.37.27: भरत और शत्रुघ्न भी फटे-पुराने वस्त्र पहनकर वन में रहेंगे और वहाँ रहने वाले अपने बड़े भाई श्री राम की सेवा करेंगे॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.37.27 
भरतश्च सशत्रुघ्नश्चीरवासा वनेचर:।
वने वसन्तं काकुत्स्थमनुवत्स्यति पूर्वजम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भरत और शत्रुघ्न भी फटे-पुराने वस्त्र पहनकर वन में रहेंगे और वहाँ रहने वाले अपने बड़े भाई श्री राम की सेवा करेंगे॥ 27॥
 
‘Bharata and Shatrughna will also wear tattered clothes and live in the forest and serve their elder brother Sri Rama who lives there.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)