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ramayan 2.37.16: वे सब बहुत दुःखी हुए और तेजस्वी श्री राम से बोले - 'बेटा! बुद्धिमान सीता को इस प्रकार वनवास जाने का आदेश नहीं दिया गया है।   |   ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.37.16 
ऊचुश्च परमायत्ता रामं ज्वलिततेजसम्।
वत्स नैवं नियुक्तेयं वनवासे मनस्विनी॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वे सब बहुत दुःखी हुए और तेजस्वी श्री राम से बोले - 'बेटा! बुद्धिमान सीता को इस प्रकार वनवास जाने का आदेश नहीं दिया गया है।
 
All of them became very upset and said to the radiant Sri Rama - 'Son! The wise Sita has not been ordered to go into exile in this manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)