श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.37.15 
रामं प्रेक्ष्य तु सीताया बध्नन्तं चीरमुत्तमम्।
अन्त:पुरचरा नार्यो मुमुचुर्वारि नेत्रजम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सीता को उत्तम वस्त्र पहना रहे श्री राम को देखकर महल की स्त्रियों की आँखों से आँसू बहने लगे।
 
Looking at Sri Rama who was dressing Sita in the finest clothes, the women of the palace began to shed tears from their eyes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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