Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.37.13: वस्त्र धारण करने में अपनी न्यूनता के कारण लज्जित होकर जनकननदिनी सीता ने छाल का एक टुकड़ा गले में डाल लिया और दूसरा हाथ में लिए चुपचाप खड़ी हो गईं ॥13॥ | ramayan सर्ग 2.37: श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वस्त्र धारण करने में अपनी न्यूनता के कारण लज्जित होकर जनकननदिनी सीता ने छाल का एक टुकड़ा गले में डाल लिया और दूसरा हाथ में लिए चुपचाप खड़ी हो गईं ॥13॥
Ashamed of her lack of skill in wearing the cloth, Janakanandini Sita put one piece of bark around her neck and stood quietly holding the other in her hand. ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥