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श्लोक 2.36.33  |
अनुव्रजिष्याम्यहमद्य रामं
राज्यं परित्यज्य सुखं धनं च।
सर्वे च राज्ञा भरतेन च त्वं
यथासुखं भुङ्क्ष्व चिराय राज्यम्॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| 'अब मैं यह राज्य, धन और सुख छोड़कर श्री राम के पीछे चलूँगा। ये सब लोग भी उनके साथ चलेंगे। तुम अकेले ही राजा भरत के साथ दीर्घकाल तक सुखपूर्वक राज्य भोगते रहोगे।'॥33॥ |
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| 'Now I will leave this kingdom, wealth and happiness and follow Shri Ram. All these people will also go with him. You alone will continue to enjoy the kingdom happily with King Bharat for a long time.'॥ 33॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे षट्त्रिंशः सर्ग:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें छत्तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३६॥ |
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