Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.36.30: 'अतः देवि! श्री रामचन्द्रजी के राज्याभिषेक में विघ्न डालने से तुम्हें कोई लाभ नहीं होगा। शुभान्ने! तुम्हें लोक-निंदा से भी बचने का प्रयत्न करना चाहिए। 30॥ | ramayan सर्ग 2.36: दशरथ का श्रीराम के साथ सेना और खजाना भेजने का आदेश, कैकेयी द्वारा इसका विरोध, राजा का श्रीराम के साथ जाने की इच्छा प्रकट करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदलं देवि रामस्य श्रिया विहतया त्वया।
लोकतोऽपि हि ते रक्ष्य: परिवाद: शुभानने॥ ३०॥
अनुवाद
'अतः देवि! श्री रामचन्द्रजी के राज्याभिषेक में विघ्न डालने से तुम्हें कोई लाभ नहीं होगा। शुभान्ने! तुम्हें लोक-निंदा से भी बचने का प्रयत्न करना चाहिए। 30॥
'So Devi! You will not get any benefit by disrupting the coronation of Shri Ramchandraji. Shubhanane! You should also try to avoid public criticism. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥