श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 36: दशरथ का श्रीराम के साथ सेना और खजाना भेजने का आदेश, कैकेयी द्वारा इसका विरोध, राजा का श्रीराम के साथ जाने की इच्छा प्रकट करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.36.15 
तस्यैतत् क्रोधसंयुक्तमुक्तं श्रुत्वा वराङ्गना।
कैकेयी द्विगुणं क्रुद्धा राजानमिदमब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजा के ये क्रोध भरे वचन सुनकर सुन्दरी कैकेयी उनसे भी दुगुनी क्रोधित हो गई और उनसे इस प्रकार बोली-॥15॥
 
Hearing these angry words of the king, the beautiful Kaikeyi became twice as angry as him and spoke to him thus -॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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