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ramayan 2.35.29: 'तुम्हें ऐसा नहीं बनना चाहिए - इस कहावत को अपने जीवन में व्यवहार में मत लाओ। राजा ने जो कुछ कहा है, उसे स्वीकार करो (श्री राम का राज्याभिषेक हो)। अपने पति की इच्छा का पालन करो और इस समुदाय को यहाँ आश्रय देने वाली बनो।॥29॥   |   ramayan सर्ग 2.35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.35.29 
नैवं भव गृहाणेदं यदाह वसुधाधिप:।
भर्तुरिच्छामुपास्वेह जनस्यास्य गतिर्भव॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हें ऐसा नहीं बनना चाहिए - इस कहावत को अपने जीवन में व्यवहार में मत लाओ। राजा ने जो कुछ कहा है, उसे स्वीकार करो (श्री राम का राज्याभिषेक हो)। अपने पति की इच्छा का पालन करो और इस समुदाय को यहाँ आश्रय देने वाली बनो।॥29॥
 
‘You should not become like this – do not bring this proverb into practice in your life. Accept whatever the king has said (let Shri Ram be crowned). Follow your husband's wish and become the one who gives shelter to this community here.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)