श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.35.21 
तत्र ते जननी क्रुद्धा मृत्युपाशमभीप्सती।
हासं ते नृपते सौम्य जिज्ञासामीति चाब्रवीत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी माता भी उसी पलंग पर सोती थी। यह सोचकर कि राजा मेरा उपहास कर रहा है, वह क्रोधित हो गई और उसे फाँसी पर चढ़ा देने की इच्छा से बोली, 'सौम्य! हे मनुष्यों के स्वामी! मैं तुम्हारी हँसी का कारण जानना चाहती हूँ।'
 
‘Your mother also slept on the same bed. Thinking that the king is making fun of me, she became angry and said with the desire to hang him to death, ‘Soumya! O Lord of men! I want to know the reason for your laughter.'
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