श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.35.17 
आभिजात्यं हि ते मन्ये यथा मातुस्तथैव च।
न हि निम्बात् स्रवेत् क्षौद्रं लोके निगदितं वच:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी! मैं तो यह मानता हूँ कि तुम्हारी माता का स्वभाव अपने कुल के अनुरूप ही था। लोगों में यह कहावत प्रचलित है कि नीम के वृक्ष से शहद नहीं टपकता।॥17॥
 
‘Kaikeyi! I think that your mother had a nature that was in keeping with her family. The saying that is popular among people is true that honey does not drip from neem tree.॥ 17॥
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