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ramayan 2.35.15: अथवा बड़े-बड़े ब्रह्मर्षियों के शाप, जो देखने में भयानक हैं और जलाकर भस्म कर देने वाले हैं, तुम जैसे पाषाणहृदय मनुष्य को, जो भगवान् राम को घर से निकालने के लिए तैयार खड़ा है, क्यों नहीं नष्ट कर देते?॥15॥   |   ramayan सर्ग 2.35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.35.15 
महाब्रह्मर्षिसृष्टा वा ज्वलन्तो भीमदर्शना:।
धिग्वाग्दण्डा न हिंसन्ति रामप्रव्राजने स्थिताम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अथवा बड़े-बड़े ब्रह्मर्षियों के शाप, जो देखने में भयानक हैं और जलाकर भस्म कर देने वाले हैं, तुम जैसे पाषाणहृदय मनुष्य को, जो भगवान् राम को घर से निकालने के लिए तैयार खड़ा है, क्यों नहीं नष्ट कर देते?॥15॥
 
‘Or why don’t the curses of great brahmarshis, which are terrifying to look at and capable of burning to ashes, destroy a stone-hearted person like you who is standing ready to expel Lord Rama from his home?॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)