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ramayan 2.35.12-13: 'तेरे सभी सम्बन्धी और गुणी ब्राह्मण भी तुझे त्याग देंगे। देवि! फिर इस राज्य को पाकर तुझे क्या सुख मिलेगा? हे! तू ऐसा अधर्मी कार्य करना चाहती है। 12-13॥   |   ramayan सर्ग 2.35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  2.35.12-13 
त्यक्ता या बान्धवै: सर्वैर्ब्राह्मणै: साधुभि: सदा॥ १२॥
का प्रीती राज्यलाभेन तव देवि भविष्यति।
तादृशं त्वममर्यादं कर्म कर्तुं चिकीर्षसि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'तेरे सभी सम्बन्धी और गुणी ब्राह्मण भी तुझे त्याग देंगे। देवि! फिर इस राज्य को पाकर तुझे क्या सुख मिलेगा? हे! तू ऐसा अधर्मी कार्य करना चाहती है। 12-13॥
 
'All your relatives and virtuous Brahmins will also abandon you. Goddess! Then what joy will you get after getting this kingdom? Oh! You want to do such an indecent act. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)