Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.34.42-43h: 'अब मेरा वन जाने का निर्णय नहीं बदला जा सकता। हे वरदाता राजन! देवताओं और दानवों के युद्ध के समय आपने कैकेयी को जो वरदान दिया था, उसे पूरा कीजिए और सत्यनिष्ठ रहिए।' | ramayan सर्ग 2.34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'अब मेरा वन जाने का निर्णय नहीं बदला जा सकता। हे वरदाता राजन! देवताओं और दानवों के युद्ध के समय आपने कैकेयी को जो वरदान दिया था, उसे पूरा कीजिए और सत्यनिष्ठ रहिए।'
‘My decision to go to the forest cannot be changed now. O boon-giver king! Please fulfill the boon you had promised to Kaikeyi during the war between gods and demons and be truthful.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥