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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.34.41 
इयं सराष्ट्रा सजना धनधान्यसमाकुला।
मया विसृष्टा वसुधा भरताय प्रदीयताम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
'मैंने धन-धान्य से भरपूर इस सम्पूर्ण पृथ्वी को, यहाँ रहने वाले मनुष्यों और राष्ट्रों सहित त्याग दिया है। कृपया इसे भारत को दे दीजिए॥ 41॥
 
'I have abandoned this entire earth, rich in wealth and grains, along with the people and the nations living here. Please give it to Bharat.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)