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ramayan 2.32.43: गौओं के उस महान समूह को पाकर महर्षि त्रिजट अपनी पत्नी सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए, वे महात्मा श्री राम को यश, बल, प्रेम और सुख की वृद्धि करने वाले आशीर्वाद देने लगे॥43॥   |   ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.32.43 
तत: सभार्यस्त्रिजटो महामुनि-
र्गवामनीकं प्रतिगृह्य मोदित:।
यशोबलप्रीतिसुखोपबृंहिणी-
स्तदाशिष: प्रत्यवदन्महात्मन:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
गौओं के उस महान समूह को पाकर महर्षि त्रिजट अपनी पत्नी सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए, वे महात्मा श्री राम को यश, बल, प्रेम और सुख की वृद्धि करने वाले आशीर्वाद देने लगे॥43॥
 
After finding that great group of cows, the great sage Trijat along with his wife were very happy, they started giving blessings to Mahatma Shri Ram which increase fame, strength, love and happiness. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)