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ramayan 2.32.39: धर्मात्मा श्री राम ने त्रिजटा को गले लगाया और सरयू के तट से उस स्थान तक, जहाँ दूसरी ओर छड़ी गिरी थी, सभी गायों को बुलाकर त्रिजटा के आश्रम में भेज दिया।   |   ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.32.39 
तं परिष्वज्य धर्मात्मा आ तस्मात् सरयूतटात्।
आनयामास ता गावस्त्रिजटस्याश्रमं प्रति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा श्री राम ने त्रिजटा को गले लगाया और सरयू के तट से उस स्थान तक, जहाँ दूसरी ओर छड़ी गिरी थी, सभी गायों को बुलाकर त्रिजटा के आश्रम में भेज दिया।
 
The virtuous Shri Ram embraced Trijata and called for all the cows from the bank of Saryu to the place where the stick had fallen on the other side and sent them to Trijata's ashram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)