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ramayan 2.32.21: सुमित्राकुमार! उपर्युक्त वस्तुओं के अतिरिक्त एक हजार गौएँ भी भेजो, जिनके लिए दही, घी आदि आहार-पदार्थ हों। माता कौशल्या के पास करधनीधारी ब्रह्मचारियों का एक बड़ा समूह आया है। उनमें से प्रत्येक को एक-एक हजार स्वर्ण मुद्राएँ दो॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.32.21 
व्यञ्जनार्थं च सौमित्रे गोसहस्रमुपाकुरु।
मेखलीनां महासङ्घ: कौसल्यां समुपस्थित:।
तेषां सहस्रं सौमित्रे प्रत्येकं सम्प्रदापय॥ २१॥
 
 
अनुवाद
सुमित्राकुमार! उपर्युक्त वस्तुओं के अतिरिक्त एक हजार गौएँ भी भेजो, जिनके लिए दही, घी आदि आहार-पदार्थ हों। माता कौशल्या के पास करधनीधारी ब्रह्मचारियों का एक बड़ा समूह आया है। उनमें से प्रत्येक को एक-एक हजार स्वर्ण मुद्राएँ दो॥ 21॥
 
‘Sumitrakumar! Besides the above-mentioned things, also send a thousand cows for their food items like curd, ghee etc. A large group of brahmacharis wearing girdles has come to mother Kausalya. Give each of them a thousand gold coins.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)