vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना
»
श्लोक 8
श्लोक
2.31.8
यदर्थं प्रतिषेधो मे क्रियते गन्तुमिच्छत:।
एतदिच्छामि विज्ञातुं संशयो हि ममानघ॥ ८॥
अनुवाद
'निष्पाप रघुनन्दन! मैं यह जानना चाहता हूँ कि आप मुझे अपने साथ चलने से क्यों मना कर रहे हैं। इस विषय में मेरे हृदय में बहुत संदेह है।'॥8॥
'Innocent Raghunandan! I want to know the reason why you are forbidding me from accompanying you. I have a lot of doubt in my heart about this.'॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×