श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.31.8 
यदर्थं प्रतिषेधो मे क्रियते गन्तुमिच्छत:।
एतदिच्छामि विज्ञातुं संशयो हि ममानघ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'निष्पाप रघुनन्दन! मैं यह जानना चाहता हूँ कि आप मुझे अपने साथ चलने से क्यों मना कर रहे हैं। इस विषय में मेरे हृदय में बहुत संदेह है।'॥8॥
 
'Innocent Raghunandan! I want to know the reason why you are forbidding me from accompanying you. I have a lot of doubt in my heart about this.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)