श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.31.6 
एवं ब्रुवाण: सौमित्रिर्वनवासाय निश्चित:।
रामेण बहुभि: सान्त्वैर्निषिद्ध: पुनरब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान राम ने ऐसी बातें कहकर वन जाने का निश्चय करने वाले सुमित्रापुत्र लक्ष्मण को बहुत-सी सान्त्वनापूर्ण बातें कहकर समझाकर वन में जाने से मना किया, तब वे पुनः बोले-॥6॥
 
When Lord Rama, after convincing Sumitra's son Lakshmana, who had decided to go to the forest after having said such things, by giving him many consoling words, forbade him from going to the forest, then he spoke again -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)