श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.31.4 
मया समेतोऽरण्यानि रम्याणि विचरिष्यसि।
पक्षिभिर्मृगयूथैश्च संघुष्टानि समन्तत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘तुम मेरे साथ पक्षियों के कलरव और मधुमक्खियों के झुंडों के गुंजन से गूंजते हुए सुंदर वनों में घूमोगे।॥4॥
 
‘You will wander with me all around in the beautiful forests resounding with the chirping of birds and the humming of swarms of bees.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)