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ramayan 2.31.25: 'मैं धनुष-बाण, भाला और टोकरी लेकर तुम्हारे आगे-आगे चलूँगा और तुम्हें मार्ग दिखलाऊँगा॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 2.31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.31.25 
धनुरादाय सगुणं खनित्रपिटकाधर:।
अग्रतस्ते गमिष्यामि पन्थानं तव दर्शयन्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'मैं धनुष-बाण, भाला और टोकरी लेकर तुम्हारे आगे-आगे चलूँगा और तुम्हें मार्ग दिखलाऊँगा॥ 25॥
 
'With a bow and arrow, and a spear and a basket, I will go before you, showing you the way.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)